सवाल पढ़ कर आप कहेगें ,‘ यह कैसा सवाल है अभी कल- - अ ,नही शायद परसों - - नही शायद पिछले हफ्ते - - या - -’ जाने दीजिये आप को याद नही आयेगा । मैं स्वंय पिछले कई दिन से अपने देश के प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह को न्यूज़ चैनल और समाचार पत्रों में खोज रही हूँ परन्तु वह मुझे मिल नही रहे । कुछ चैनल पर मनमोहन जी के फोटो सहित ब्यान अवशय आये आर्थिक मंदी ,चन्द्र्यान मिशन और त्योहारों पर देशवासियों को बधाई के। वह भी लाईव टैलीकास्ट नही बल्कि उनकी पुरानी तस्वीरों के साथ उनके ब्यान नज़र आते है। आतंकवाद ,बेलगाम महँगाई , ठाकरे ,राहुल राज केस ,बाटला एन्काऊटर ,असुरक्षित दिल्ली आदि कई ऐसे मुद्दे है जिस पर देश में आये दिन चर्चा होती ही रहती है जिस पर जनता से ले कर नेता तक बोलते है पर जिस व्यक्ति का ब्यान अहमियत रखता है वही बस खामोश है । मनमोहन सिंह जी की सरकार तथा पार्टी का लगभग हर छोटा-बड़ा नेता हर दूसरे-तीसरे दिन मीडिया में लोगों को ब्यानबाज़ी करता दिख जाता है ,नही दि्खाई देते तो मनमोहन सिंह जी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी कहते है कि ,‘देश के बैंक पूरी तरह से सुरक्षित है ,चिन्ता की कोई बात नही । ’ पर मनमोहन सिंह जी देशवासी असुरक्षित है उसकी तो चिन्ता कीजिये । कही बम ब्लास्ट तो कही दंगे। इतना अनिश्चित तो आज शेयर बाज़ार भी नही है जितना इस महौल में एक आम आदमी का जीवन हो गया है ।
देश को इंतज़ार है मनमोहन जी के बोलने का पर मनमोअहन सिंह जी को किस का इंतज़ार है - - शायद मैडम जी की अनुमति का ।
Tuesday, November 11, 2008
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13 comments:
अच्छा कमेंट है....
Rahne dijiye mam, kyu bechare sidhe-sadhe insaan ko tension deti hain. kya bigada hai usne apka? chalne dijiye desh jaise chalta hai. bechare ka saal, 2 saal
rah gya hai kaat lene dijiye na madam ke isharon par. wo bhi khus madam bhi khus.
Very Nice. ब्लोगिंग जगत में आपका स्वागत है. खूब लिखें, खूब पढ़ें, स्वच्छ समाज का रूप धरें, बुराई को मिटायें, अच्छाई जगत को सिखाएं...खूब लिखें-लिखायें...
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आप मेरे ब्लॉग पर सादर आमंत्रित हैं.
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अमित के. सागर
(उल्टा तीर)
अच्छा लिखा है. मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है.
http://www.ashokvichar.blogspot.com
स्वागत है आपका भी ईस कबडी के खेल में यानी ब्लॉग की भिड भारी दुनिया में मेडमजी ! प्रधानमंत्रीजी की आप जो बात कर रही है सायद वो उचीत नही है , भारत की अर्थ व्यवस्था एक दम दुरुस्थ ही नही ठीक ठाक भी है aapaki जानकारी के liye बता रहा हु!
हम जैसे बयानबाजी के गुलाम हो गए हैं। बड़ी बड़ी घटनाओं पर काम चाहे ना हो, बयान जरूर चाहते हैं। देश में बयानबाजी बहुत हो चुकी रितु, अब काम करने वालों की दरकार है। चुनाव सन्निकट हैं, विचारोत्तेजक लेख लिखकर युवाओं से सही निर्णय की अपील कीजिए। अब और बयान नहीं।
अच्छे भावों को सुंदर तरीके से पिरोया है
यह कम है की प्रधानमंत्री सिर्फ़ मीडिया पर दिखने और पूजे जाने की प्रवृत्ति से दूर हैं. तरुश्री जी की बातों को भी ध्यान में रखें. स्वागत मेरे ब्लॉग पर भी.
kalyan ho
narayan narayan
achchha comment kiya hai aapne aur us par usse achchhi tippani ki hai Naaz kalra ji ne.
ye word verification hata de to tippani karne me aasani hogi.
------------------------"Vishal"
सुंदर विचारोद्वेलित करती आपकी प्रवाह युक्त रचना स्वागत है
बहुत अच्छा कमेंट लिखा है आपने।
मैं उन सभी की बहुत आभरी हूँ जिन्होने मेरे लेख पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है । ‘हे प्रभु यह तेरा पथ’ की प्रतिक्रिया के जवाब में इतना ही कहूँगीं कि देश की अर्थव्यवस्था मैं भी अच्छी ही मानती हूँ । मैंने एक भारतीय की ज़िदगी की चिन्ता के बारे में लिखा है ,देश की अर्थ्व्यवस्था के बारे में नही और अगर सिर्फ अकेली अर्थव्यवस्था की चिन्ता करना ही प्रधानमंत्री जी का काम है तो फिर वित्तमंत्रालय और वित्तमंत्री जी किस लिये है । तरुश्री जी की बातों से मैं सहमत हूँ कि लेख विचारोत्तक होने चाहिये । पर तरुश्री जी की इस बात से मैं सहमत नही हूँ कि हम ब्यानबाज़ी के गुलाम है । तनुश्री जी मैं कोई नेता नही हूँ कि ब्यानबाज़ी करुँगीं । एक भारतीय होने के नाते जो मैंने महसूस किया उसे लिखा है । रही प्रधनमंत्री जी के ब्यानों की बात मैंने उन के ब्यान की नही उन के नकारात्मक रवैये की बात की है । आप स्वंय देख ले जिन मुद्दों को मैने लेख में उठाया मानीनय प्रधान्मंत्री जी ने उन में से कितनों पर काम करने के लिये संबधित मंत्राल्यों को निर्देश दिये है ,इसी से पता चल जाता है कि उन्होंने क्या काम किये है । अभिषेक जी ने लिखा कि वह मीडिया पर दिखाये और पूजे जाने की प्रवृत्ति से दूर है । अभिषेक जी वास्तविकता यह है कि वह देश से ही दूर रहते है । जहाँ एक ओर देश में समस्याएं बढ़ती है वही दूस्री ओर प्रधानमंत्री जी के दौरे बढ़ते है । चन्द्र्यान मिशन पर प्रधानमंत्री जी का रवैया बेहद निराशाजनक रहा । चन्द्र्यान मिशन देश के लिये एक गौरवशाली उपलब्धि है पर देश के प्रधानमंत्री इसरो जा कर बधाई देना तो दूर ,दूर जा कर बधाई संदेश भी नही दे सके । चन्द्र्यान मिशन की शायद उन्हें इतनी चिन्ता नही थी जितना उन्हें ओबामा के फोन की थी । इसलिये मीडिया में उन्होंने सपष्टीकरण भी दिया कि ओबामा ने उन्हें फोन मिलाने की कोशिश की पर फोन मिला नही । क्या मीडिया मे ऐसे सपष्टीकरण की आवश्यकता थी ?
ऋतु महाजन
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