Friday, January 16, 2009

चुनाव में नेताजी और जानवरों में समानता

एक गाँव में हिंदी का पेपर शुरु होने वाला था । पेपर बाँटते समय ही मास्टर जी ने सख्त ताकीद कर दी कि प्रश्न-पत्र के बारे में कोई भी उन से कुछ नही पूछेगा ,जिस की समझ में जो आयें लिख दें । इस का सबसे बड़ा कारण था कि उनकी पत्नी अनारों देवी विधानसभा चुनाव हार गयी थी और मास्टर जी का रोम-रोम गुस्से से सुलग रहा था ।प्रश्न-पत्र बाँट कर मास्टर जी अंग्रेज़ी की फिल्मी पत्रिका देखने में व्यस्त हो गये और बच्चे हिंदी का पेपर हल करने में जुट गये । प्रश्न-पत्र में निबंध के प्रश्न में लिखा था - नीचे दिये विषय पर निबंध लिखें । प्रश्न अनिवार्य है ।

चुनावों में नेताजी और जानवरों में समानता ।

प्रश्न पढ़ छात्र बेचारे परेशान ,एक दूसरे को देख रहे है ,मास्टर जी से पूछने की किसी में हिम्मत नही हो रही । पर कुछ समझ में भी नही आ रहा था । हुआ यूं था कि प्रश्न-पत्र छापने वाले ने प्रश्न तो सही छापा था बस साथ में यह नही छापा कि इन दोनों में से किसी एक पर निबंध लिखना है ।

बाकी सब ने तो उस प्रश्न को हल नही किया पर उन में से एक छात्र ने निबंध पर लिखने का फैसला कर लिया । वह लड़का अपने पिता के साथ चुनावी रैलियों में नेताओं के पक्ष में नारे लगाने जाता था ,उसे लगा उसका वह अनुभव इस प्रश्न को हल करने में काम आ सकता है । और उस ने कुछ इस तरह से निबंध लिखा -

चुनावों में नेताजी और जानवरों में बहुत समानता होती है यह नीचे दिये तथ्यों से साबित होता है -

कौआ - चुनावों में नेताजी कौऐ की तरह कांय-कांय करते है ।

कुत्ता - चुनावों में नेताजी अपने विरोधियों पर कुत्ते की तरह भौंकतें है ।

तोता - तोते की तरह एक ही वायदे को बार-बार दोहराते है ।

गधा - गधे की तरह काम करते हुये दिन में कई- कई रैलियाँ कररते है ।

उल्लू - उल्लू की तरह रात-रात जाग कर प्रचार करते है ।

बंदर - बंदर की तरह कभी गाड़ी पर तो कभी उड़नखटोले पर चढ़ते है ।

गिरगिट - गिरगिट के तरह पार्टी और ब्यान बदलते है ।

खरगोश - खरगोश की तरह अपने विरोधियों से तेज़ भागने की कोशिश करते है ।

उपरोक्त बातों से सिद्ध होता है कि चुनावों में नेताजी और जानवरों में अधिक अंतर नही होता ।

पूरा निबंध लिखने के बाद लड़के ने उसे दो बार पढ़ा कि कही उस में कोई गलती तो नही ,आखिर दस नंबर का सवाल है , फिर जब छात्र को पूरी तसल्ली हो गयी तो उसने हल की हुई शीट मास्टर जी को सौंप दी ।

अब कृप्या आप यह मत पूछिये कि उसे कितने अंक मिले । हाँ अगर छात्र का निबंध आप को पसंद आया हो तो एक प्रतिक्रिया ज़रुर दीजियेगा , आगे भी इस तरह के निबंध लिखने के लिये प्रोत्साहन मिलेगा ।

Thursday, January 15, 2009

क्या उद्योगपति देश के नागरिक नही है ?

देश के उद्योगपतियों ने गुजरात में समारोह के दौरान मुख्यमंत्री मोदी की जम कर तारीफ की और उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिये एक योग्य उम्मीदवार करार दे दिया । अब यह बात कांग्रेस को कैसे हज़म हो जायें । एक तो मोदी की इतनी तारीफ हो जायें और ऊपर से उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिये एक योग्य उम्मीदवार तक कह दिया जायें जिस पर गाँधी-नेहरु परिवार के इलावा और किसी का हक ही नही । जिस पर किसी और का बैठना तो दूर किसी और को उस के बारे में सोचना भी नही चाहिये । लिहाज़ा कांग्रेस को मिर्ची लगना स्वभाविक था पर जलन में कांग्रेस ऐसी प्रतिक्रिया देगें इस की उम्मीद नही थी । कांग्रेस प्रवक्ता मुनीष तिवारी का कहना है देश के मामलों में उद्योग जगत टाँग ना अड़ाए । क्यों ? क्या उद्योगपति देश के नागरिक नही है ? तो फिर वे अपने विचार क्यों ना प्रकट करें । कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि देश का प्रधानमंत्री उद्योग जगत की हस्तियां नही बल्कि देश की जनता चुनती है । बोलने से पहले कांग्रेस प्रवक्ता कुछ सोच तो लेते ,मनमोहन जी को प्रधानमंत्री देश की जनता ने नही आप की मैडम जी ने चुना था । आप ने तो चुनावों में किसी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार ही घोषित नही किया था ।

क्या दाउद को भी कार्ड भेजा जायेगा - समाचार है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाक राष्ट्रपति ज़रदारी को नव वर्ष की शुभकामनाओं वाला ग्रीटिंग कार्ड भेजा है । समझ में नही आता कि मनमोहन जी देश को किस-किस तरीके से शर्मसार करने पे तुले है ,क्या शर्मसार करने का विश्व रिकार्ड बनाना चाहते है । कभी आई.एस.आई चीफ को बुलाते है ,कभी हर विक्लप खुले रखने की बात करते है ,कभी युद्ध को समस्या का हल नही कहते है । और अब ज़रदारी को नव वर्ष की शुभकामनाओं वाला ग्रीटिंग कार्ड भेज दिया । संदेश लिखने के लिये स्याही की जगह क्या पता मुबंई हमले में मारे गये लोगों का खून इस्तेमाल कर लिया हो , अब तो आप से यह उम्मीद भी की जा सकती है । वैसे एक और खबर है कि दाउद नाना बन गया ,मुबारक का एक कार्ड अगर आप उसे भी भेज देगें तो अब देश की जनता को इस पर भी कोई हैरानी नही होगी । देशवासी अब आप को हर वह काम करता देखने के आदी हो गये है जिससे देश शर्मसार होता हो ,इसलिये लोगों की परवाह मत कीजिये ।

Sunday, January 11, 2009

कितनी खुशी की बात है ,भगवान, बधाई मनमोहन जी !

कितने दिनों के बाद मनमोहन जी को इतनी खुशी मिली होगी भगवान - - । आखिर पाक मान ही गया कि कसाब उसका नागरिक है । अब ? अब यह सीरियल थोड़ा आगे बढ़ेगा वर्ना तो सास बहू स्टाईल में ही चल रहा था । सब के ज़ेहन में सवाल यह है कि अब आगे क्या होगा ? अरे भाई इतने सास-बहू सीरियल देख लिये है अब तो यह सवाल ज़ेहन में आना ही नही चाहिये । और इतने सालों से सरकारों को अपनी उपलब्धियों पर जशन मनाने के तरीकों को भी तो देखा है या तो छुट्टी मनाते है या फिर समारोह करते है ।

अब क्योंकि यह तो बड़ी खुशी की बात है तो ज़ाहिर है देश में पाँच या दस दिन की छुट्टी होगी । हमारे शहर के शिक्षण संस्थानों में तो हो भी गयी ,हालांकि छात्र और अभिभावक यही समझते है कि धुंध और सर्दी के कारण हुई है । एक दिन के लिये बैंक भी छुट्टी करेंगें । नकद या चैक अगर निकलना या बनवाना चाहते है तो अभी कर लीजिये । फिर बड़ी-बड़ी रैलियाँ और सैमीनार होगें ,आखिर उपलब्धि भी तो छोटी-मोटी नही है ना ! फिर दो-तीन दिन बाद समाचार पत्रों और टी.वी पर घोषणा होगी कि फलां दिन प्रधानमंत्री राष्ट्र को सम्बोधित करेगें । फिर निश्चित दिन व समय पर प्रधानमंत्री जी मैडम जी की इजाज़त ( सौरी आर्शीवाद ) से राष्ट्र को सम्बोधित करेगें , मेरे प्यारे देश्वासियों आप जानते ही हो कि आज कितने दिनों बाद मैं खुशी और राहत महसूस कर रहा हूँ । आखिर सोनिया जी, राहुल बाबा और बुश जी की कोशिशों से पाक ने कसाब को अपना नागरिक मान लिया है । पाक ने बुश जी से वायदा किया है कि जिस दिन भारत कसाब को उसके हवाले करेगा वे उस पर मुकदमा चला कड़ी सज़ा देगें ,पर इस से पहले कि कसाब को हम लाटस आफ गिफ्ट दे समझौता एक्सप्रैस में रवाना करें हम उसे देश के लोगों के सामने लाने के लिये बाकायदा एक समारोह करेंगें और उस में देश की बड़ी हस्तियों को बुलायेगें , नाम तय करने के लिये मैडम आज मीटिंग करेंगी । सोनिया माता की जै ,धन्यवाद ।

रात को कैबिनट की बैठक होगी जिस में हर बार की तरह मैडम जी बोलेगी और बच्चे ( मंत्री जी ) सुनेगें । मीटिंग के फैसले कुछ ऐसे होगें - इतने बड़े काम को करने के लिये पार्टी मनमोहन जी को भारत रत्न तथा प्रणव दादा को बहादुरी का कोई पुरस्कार देने की सिफारिश करेगी । आखिर इस में प्रणव दादा की ब्यानबाज़ी को भी तो सम्मान मिलना ही चाहिये । इतना बोलने से पता नही प्रणव दादा का कितना वेट लूज़ हो गया होगा । दूसरे फैसले में तय किया जायेगा कि कौन मंत्री बोलेगा । मनमोहन जी क्हगें कि मेरे लिये भाषण देना बुश जी से बात करने जितना आसन थोड़े है ,यह काम तो मैडम जी या देश का भविष्य राहुल जी ही कर सकते है । तब मैडम जी यह काम भी प्रणव दादा के नाज़ुक कंधों पर ही डाल देगी । बाकी सब मंत्रियों को चुप रहने के लिये कहा जायेगा । डर भी होगा कि चिदम्बरम जी कसाब पर बोलते-बोलते कही होम लोन की ब्याज दरों पर ही ना बोलने लगें । इसी तरह लालू रेलवे पर और पासवान निजी कम्पनियों में आरक्षण पर ना बोलने लगें । अब मेहमानों की लिस्ट तैयार की जायेगी । प्रियंका गाँधी ,अमर सिंह जावेद अख्तर ,कुलदीप नैयर , अमिताभ बच्चन ,खुशवंत सिंह ,आमिर खान ,शाहरुख खान ,राम जेठमलानी ,एम.एफ.हुसैन ,अंतुले और शिवराज पाटिल । पाटिल जी से अपने नये तथा मँहगे वस्त्र और जूते पहन कर आने के लिये कहा जायेगा ताकि समारोह की शान बढ़े। सब मेहमान कसाब से एक-एक प्रश्न पूछ सकते है । जैसे प्रियंका जी पूछ सकती है कि कसाब ने इतने लोगों को क्यों मारा , कुलदीप जी मोमबत्ती जला सकते है ,अमर सिंह जी कसाब के लिये ज़्यादा सुविधाएं माँग सकते है ,हुसैन पेटिंग बना सकते है ,अमित जी कसाब की मानसिकता जान सकते है । सब को बोलने के लिये एक मिनट मिलेगा सिवाये शाहरुख और आमिर के । क्योंकि शाहरुख को कसाब बोलने में एक मिनट लग जायेंगा और आमिर को एक मिनट यह समझने में कि वे वहाँ ना तो अपनी फिल्म के प्रचार के लिये आये है और ना ही अपने सहयोगी कलाकारों का मज़ाक उड़ाने । मीटिंग में जिन लोगो के आने पर पूर्ण प्रतिबंध होगा वे है – मनिंदर्जीत सिंह बिट्टा ,के.पी.एस.गिल ,नरेन्द्र मोदी शिव सेना और आर.एस.एस के सभी शाखाओं के नेता । कसाब की सुरक्षा के लिये उसे मनमोहन, प्रणव और चिदम्बरम के बीच बिठाया जायेगां । आखिर में कसाब तथा आये मेहमानों को कबाब और अन्य व्यंजन दिये जायेगें और फिर आखिर में सब डी.जे की धुन पर नाचेगें आज से पहले आज से ज़्यादा खुशी आज तक नही मिली , मनमोहन जी गायेगें , आजो सारे रल मिल भगंड़ा पा लईये । इन सारे फैसलों की जानकारी मीडिया को देने की ज़िम्मेदारी भी मैडम ने प्रणव दादा के ही नाज़ुक कंधों पर डाल दी ।

मीटिंग खत्म करने से पहले मैडम जी ने सब को आदेश दिया कि समारोह शुरु होने पर सब मंत्री अपने नाम के साथ अपना पद बतायेगें , इस लिये रिर्हसल की जायें , पर उस समय हुई रिर्हसल के दौरान चिदम्बरम जी खुद को वित्त मंत्री बोल गये ,जिससे नाराज़ मैडम जी ने उन्हें कागज़ पर सौ बार गृहमंत्री लिखने और इतनी बार बोलने की सज़ा दी । और उन पर नज़र रखने के लिये राहुल बाबा को छोड़ कर मीटिंग खत्म कर दी ।

अगले दिन टी.वी पर इस शानदार समारोह को देख कर बुश जी ने खुश हो कर मनमोहन जी को बधाई दी और शांति का नोबल प्राईज़ या अमेरीका का सबसे बड़ा पुरस्कार दिलाने का भरोसा दिया ।

Monday, January 5, 2009

मनमोहन जी ,किस का पुनर्जन्म है ?

लेख पढ़ने वाले सभी पाठकों को नववर्ष की शुभकामनाएं ।

दिसम्बर महीने के शुरु में सर्दी की चपेट में आने की वजह से मुझे दो बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ा जिसके कारण मुझे पूरा महीना बैड पर अस्पताल के कमरे की छत और दीवार को देख कर या फिर टी.वी पर मंत्रियों के अजीबों-गरीब ब्यानों को देख- सुन कर गुज़ारने पड़े । कभी-कभी अपने प्रधानमंत्री मनमोहन जी को भी देख लिया , देख कर तसल्ली हुई कि वे देश में ही है ,बुश की विदाई जैसे बड़े मौके पर भी वे अमेरीका नही जा रहे । महान त्याग किया ,मैडम जी से सीखा होगा ।

बैड पर बैठे-बैठे टी.वी देखते हुये एक दिन मैंने कार्यक्रम देखा जिस में एक अमेरीकी शोधकर्ता अमिताभ ,शाहरुख ,नेहरु ,आदि कई भारतीयों के पुनर्जन्म के बारे में बता रहा था । पर अचानक मुझे ध्यान आया कि इस में मनमोहन जी के पुनर्जन्म के बारे मे नही बताया गया है । इस पर मुझे एक कहानी याद आ गयी जो मैने अपने बचपन में सुनी थी ।

एक राज्य पर उस का पड़ोसी राज्य हमला कर देता है । राजा अपनी सेना के साथ युद्ध में कूद पड़ता है । उसका सेनापति दिल का नेक पर काफी डरपोक व बड़बोला था । जोशीली ब्यानबाज़ी से जनता को मूर्ख बनाता रहता था । इसी कारण वह डर से युद्ध के मैदान से भाग कर घर आ जाता है और अपनी माँ और पत्नी से सामान बाँध दूसरे राज्य में चलने को कहता है । जब उसकी माँ और पत्नी सामान बाँध रही होती है वह बाहर बैठ जाता है । अचानक अंदर से बर्तनों के ज़ोर-ज़ोर से खड़कने की आवाज़ें आती है ,इस पर सैनिक की माँ अपनी बहू से कहती है कि मेरा बेटा तलवारों के आपस में टकराने की आवाज़ों के डर से ही तो भाग कर घर आया है तू ज़ोर-ज़ोर से बर्तनों को खड़का कर उसे डरा रही है । बाहर बैठा सैनिक यह सुन लेता है ,वह अपनी माँ से कहता है कि वह समझ गया कि जब देश खतरे में हो तो सैनिक का फर्ज़ लड़ते हुये विजय हासिल करना या शहीद होना होता है । ऐसे में डर य ब्यानबाज़ी का कोई काम नही होता ।

यह तो थी कहानी पर सवाल तो यह है कि मनमोहन जी ,किस का पुनर्जन्म है नीरो का- - ना । नीरो कम से कम बाँसुरी तो बजा ही रहा था जब रोम जल रहा था पर हमारे मनमोहन जी मुबंई हमलों के बाद से ले कर अब तक क्या कर रहें है ?

Monday, December 1, 2008

मनमोहन जी , कामपैलन पीते हो या बोर्नवीटा ?

मुझे समझ नही आता कि ईश्वर जब अक्ल बाँट रहे थे तो सरकार चला रहे लोग कहाँ थे ? दौरे पर थे या मैडम की जी-हजूरी कर रहे थे । लोग गुस्से से भरे हुये है और यह वही घिसे पिटे ब्यान देकर उनके गुस्से को और बड़ा रहे है । उससे भी अधिक गुस्सा आत है उनके हाव-भाव को देख कर । पुराने ब्यान और चकाचक कपडों के साथ अपनी बत्तीसी दिखाते हुये प्रेस कान्फ्रेंस करेगें । जब लोग मर रहें है तो ऐसे में यह कैसे अपना दिमाग (अगर है ) ठण्डा कैसे रखते है ,चाँदी वाला च्वनप्राश खाते है क्या ? पिछले कुछ दिनों में मनमोहन जी की देख कर तो मुझे पूरा यकीन हो गया है कि वे कोई ना कोई एनर्जी ड्रिंक तो लेते ही है । वर्ना इतनी चुस्ती-फुर्ती तथा बहादुरी दिखा सकते थे ? यह चुस्ती-फुर्ती नही तो और क्या है कि जो काम वे साढ़े चार सालों मे करते आये है वो सारे काम उन्हें मात्र चार दिन में करने पड़े ,बुश को फोन ,मैडम जी की जी-हजूरी ,राहुल बाबा से झाड़ । इन सारे कामों को एक के बाद एक चुस्ती से करने के लिये एनर्जी की ज़रुरत तो पड़्ती ही है । और बहादुरी की बात करे तो क्या यह बहादुरी नही कि साढे चार सालों से वे इतनी लाशों का बोझ उठा रहें है पर रोना तो दूर कभी भी आँखें तक नम नही की , हर बार पिछ्ले हादसे को भूल अगले हादसे का इंतज़ार करने लगते है । अब सवाल यह है कि कामपैलन पीते है या बोर्नवीटा ?

इन के ब्यानों से इतनी सड़ांध आती है कि इनकी तुलना कूड़े-कर्कट की गंदगी  से भी नही हो सकती । उससे से भी उपयोगी खाद बनाई जा सकती है इनके विचारों से सिवा बदूब के और कुछ नही उठता ।

‘ महान ’ शिवराज पाटिल का जाना – शिवराज जी के इस्तीफे से मेरे मन में दो सवाल उठे -

पहला - शिवराज जी के जाने पर खुश होये या नही ।

दूसरा - शिवराज जी के इस्तीफे का असली कारण ।

तय नही कर पायी कि शिवराज जी के जाने पर खुश होना चाहिये या नही । इस की वजह है कि चिदम्बरम जी का गृहमंत्री बनना । यह वह ‘ महान ’ बंदा है जिसे देश का सबसे दमदार मंत्रालय दिया गया था उसका कैसे इस ने दम निकाला है ,उससे हम सब वाकिफ है । अब की बार उसे वह मंत्रालय दिया है जिसका पहले ही दम निकला है ,अब उसका यह और क्या-क्या निकालेगा ,यह देखने वाली बात होगी ।

अब बात करें शिवराज जी के इस्तीफे का असली कारण की । इसका असली कारण है मैडम जी को हिन्दी देर से समझ आना । आज तक कांग्रेस दूसरों पर साम्प्रादायिक होने का आरोप लगाती रही ,पर अब जा कर कांग्रेस की मैडम जी  को समझ आया कि साम्प्रदायिकता तो उसके अपने घर में है । उनके लिये हिन्दू हर तरह से साम्प्रदायिकता का प्रतीक है ,पर इस सरकार में ज़्यादातर मंत्रीयों के नाम या तो हिन्दू देवी-देवताओं के नाम पर है या उनके वाहन के नाम पर या हिन्दू प्रतीकों के नाम पर । जैसे शिव ,शंकर राम ,अर्जुन,प्रसाद, ,सोमनाथ ,शरद ,अमर ,सिंह ,मीरा ,प्रणव वगैरहा-वगैरहा ।

यह बात मैडम जी को चार साल बाद समझ में आयी ,हिन्दी कमज़ोर है ना उनकी । जब नाम के मतलब समझ में आयें तो उन्होंने मनमोहन जी को बुला उन से शिकायत की । तब मनमोहन जी का जवाब था मैडम हिन्दी तो मुझे भी कहाँ आती है ,मैं तो इन्डियन हूँ हिन्दोस्तानी नही । अगर हिन्दोस्तानी होता तो रोज़ हिन्दोस्तानियों को मरता देख मेरा दिल ना रोता । अब अगर बाकी अपनी गद्दी बचाना चाहते है तो फौरन धर्म-स्थलों की और भागें ( बेवकूफों मन्दिरों की और मत भागना , गद्दी तो जायेगीं-जायेगीं ,हो सकता है आंतकी बन जेल पहुँच जाओ ) , अपना नाम बदलें हो सके तो अपने नाम में कुछ घटा-बढ़ा ले । बच जाओगे ।

Sunday, November 30, 2008

आई.एस.आई चीफ से क्या चुनाव प्रचार करवाना चाहते थे ?

मनमोहन जी ,हमें और शर्मसार मत कीजिये  - पिछला लेख ब्लाग में डालने के बाद मैंने यह तय कर लिया था कि अब इस मुद्दे पर कम से कम प्रधानमंत्री को लेकर कोई लेख नही लिखूँगी क्योंकि मुझे लगता था कि अब मनमोहन जी कुछ ऐसा नही कह सकते जिस पर देश और शर्मिन्दा होगा पर चंद घण्टों में ही मेरा विचार गलत निकला । जब पूरा आप्रेशन खत्म होने को था तभी एक समाचार न्यूज़ चैनल पर प्रसारित हुआ ,

भारतीय प्रधानमंत्री ने फोन कर पाक प्रधानमंत्री से आई.एस.आई चीफ को भारत भेजने को कहा ।

खबर है कि पाक प्रधानमंत्री ने पहले हामी भर फिर इंकार कर दिया है ।

यह पता नही कि मनमोहन जी ने फोन खुद किया था या किसी के कहने पर किया । अगर खुद किया था ( वैसे देश को उम्मीद तो नही कि इतना बड़ा काम वो खुद कर सकते है ) फिर भी अगर खुद किया है तो फिर तो देश यही चाहेंगा कि वे आगे से हर काम पूछ के किया करें और अगर पूछ कर किया था तो देश यही दुआ करेगा कि अक्ल भी बाज़ार में जल्द से जल्द मिलने लग जायें ताकि सरकार चला रहें लोगों का भला हो जायें । वैसे मैंने बहुत सोचा पर यह समझ नही आया कि वे आई.एस.आई चीफ को भारत क्यों बुलाना चाहते थे ? क्या उसे बंदी बनाना चाहते थे या उसे भारत भ्रमण करवाने का इरादा था ? नही तो कही उससे पार्टी के लिये चुनाव प्रचार या वोट तो नही चाहते थे ? यह सब काम मुश्किल है । बंदी बना नही सकते और भारत-भ्रमण में सुरक्षा का खतरा होगा ,भई देश में जगह-जगह धमाके और आतंकवादी हमले हो रहे है । अब वे देशवासी तो है नही कि जिस के लिये चिन्ता ना होगी ,अरे अगर वह मर-वर गया ना तो उसे दफनाने या उसकी लाश उसके मुल्क भेजने का खर्चा भी आप ही को करना होगा और अगर हाथ-पाँव तुड़वाकर सात-आठ महीने के लिये अस्पताल भर्ती हो गया तो उसके खाने-पीने और उसकी शरीर की सिलाई का खर्चा भी आप ही को देना होगा । और अगर उससे पार्टी के लिये चुनाव प्रचार या वोट चाहते थे तो वह भी मुश्किल होता । चुनाव प्रचार में चुनाव आचार-संहिता आड़े आती और वोट करने पर बोगस वोटिंग का मामला बनता । और चुनाव आयोग नोटिस थमा देता ,इस तरह लेने के देने पड़ जाते ,बच गये ।

इसलिये देश मनमोहन जी से उम्मीद करता है कि जो काम वे अभी तक कर रहें थे वही करे । बुश को फोन करे , फीता काटे ,बुतों पर से पर्दा हटाये ,मैडम जी की जी-हजूरी करे ,राहुल को देश का तो क्या चाहें तो सारे विश्व का भविष्य बता दें और लोगों को खुशी-गमी के संदेश भेजे । पर देशवासियों की सुरक्षा और समस्याओं जैसे छोटे-मोटे काम रहने दे ।

सलाम उन शहीदों को - मुंबई हमले में जिन वीरों ने शहादत दी है उन की वीरता पर बोलने के लिये कोई शब्द नही है हमारे पास । पूरा देश ऋणी है उनका । इन में ऐसे भी कई शहीद होगें जिन्होंने बिना वर्दी और हथियार के अदम्य साहस का परिचय देते हुये दूसरों के प्राण बचाते हुये अपना जीवन कुर्बान कर दिया । उन अन्जान चेहरों और देश के बहादुर सिपाहियों को मेरा शत-शत नमन ।

“ कोई सिख ,कोई जाट ,मराठा ,कोई बंगला ,कोई गुजराती ,

इस हमले में मरने वाला हर वीर था भारतवासी ।“

“ थी खून से लथपथ काया ,फिर भी बँदूक उठा कर ,

दस-दस को एक ने मारा ,फिर गिर गये होश गँवा कर ,

जब अंत समय आया तो कह गये कि अब चलते है ,

खुश रहना देश के प्यारों अब हम तो सफर करते है “

* * * * * * * *

“ जय हिन्द ,जय हिन्द ,जय हिन्द की सेना ।“

Saturday, November 29, 2008

प्रधानमंत्री जी ,ज़रा आँख में भरीये पानी

मुम्बई हमलों के दौरान जो मनमोहन जी ने कहा ,जो किया मुझे लगा था यह इंतहा है वे देश को इससे ज़्यादा शर्मसार नही कर सकते । लेकिन मैं गलत निकली । जिस दयनीयता ,जिस लाचारी का परिचय उन्होंने दिया निश्च्य ही हर देशवासी उससे शर्मिन्दा है ( मै कांग्रेसियों की बात नही कर रही हूँ उन को शर्मिन्दगी तभी होगी जब उन की मैडम जी कहेगीं और वे तब तक नही कहेगीं जब तक कि ऐसा उन के भाषण के पेज में नही लिखा होगा ) 

सवा सौ करोड़ की आबादी वाले इस मुल्क के लोग किसी दूसरे मुल्क की मिट्टी को छू कर सोना बनाने की ताकत रखते है , बहादुरों जवानों की कमी नही है इस मुल्क में । ऐसे देश के प्रधानमंत्री ने एक अदने से मुल्क के सामने जिस तरह अपनी लाचारी को दिखाया है वह बेहद शर्मनाक है । एक मज़बूत देश का प्रधानमंत्री इतना मजबूर कैसे हो सकता है ? किस बात ने उन्हे रोका है ? इटली से आदेश का इंतज़ार है या अमेरीका से डरते है ?

आप मुम्बई का दौरा कर आये है ,पर तनिक भी विचलित नही ,ज़रा भी आँखों में नमी नही है । पूरी दुनिया हमें कायर और कमज़ोर कह रही है पर आप बिना आक्रोश के सुन रहे है , वाकाई आप बहुत बहादुर है  पर हम आप के जितने बहादुर नही है । आप अपने सामने खून से लथपथ और दर्द से कराहते लोगों को देख कर भी शांत है पर हमारे साथ ऐसा नही है । हम टी.वी पर तस्वीरें देखते है तो गुस्से और आक्रोश से भर जाते है और अगर टी.वी नही देखते तो उन तस्वीरों के दर्द से हमारी आखें नम हो जाती है और नमी इतनी ज़्यादा होती है कि सब कुछ धुंधला-धुंधला लगता है । आप या तो हमें कुछ ऐसा उपाय बताईये जिससे आप ही की तरह हमारी आँखों का पानी भी मर जायें या फिर कुछ ऐसा कीजिये जिससे हमारी आँखों की नमी आप की आँखों में भी आ जायें ।