आज गणतंत्र दिवस पर सुबह से टी.वी पर ,समाचार-पत्रों में ,इंटर्नैट पर इस दिवस के समाचार लेख देख सुन रही हूँ । कुछ भविष्य को ले कर आशावादी थे ,कुछ देश्वासियों के रवैये को ले कर आलोचनात्मक थे , कुछ जोशीले थे तो कुछ हताश थे । मेरा व्यक्तिगत मामना रहा है कि छब्बीस जनवरी और पन्द्रह अगस्त इन दो दिनों को हर देश्वासी को ऐसे मनाना चाहिये जैसे वे अपना जन्मदिन या कोई धार्मिक उत्सव मनाता है ,खुशी औए उत्साह से ,बिना किसी से झगड़ा या किसी की आलोचना किये । आखिर साल के बाकी दिन हमने यही करना है और यही तो करते है । आज के दिन खुश रहें ,गर्व करें अपने भारतीय होने पर । जोश और खुशी से मेरा मतलब कतई यह नही कि आप पी कर होटलों में डांस करें ,तेज़ रफ्तार गाड़ी चलाएं । खुशी माता-पिता व परिवार के साथ बैठ कर भी मनाई जा सकती है ,हर तरह की टेंशन भूल कर दिल खोल कर इस दिन का स्वागत करें । हमारे पूर्वजों ने बड़ी कुर्बानियाँ दे कर हमॆ यह दिन हासिल करके दिया है । अवश्य ही पिछले जन्म में हम ने कोई एक नेक काम तो ज़रुर किया होगा जो ईश्वर ने हमें महान ऋषि-मुनियों की ,ज़ोशीले क्रान्तिकारियों की ,ओजस्वी व विचारवान विचारकों की इस धरती पर आज़ाद भारतीय के रुप में जन्म दिया । आज का दिन उन्हें धन्यवाद देने का है । इसलिये आज के दिन को उतनी ही श्रद्धा से दिल से याद करें जितनी श्रद्धा से अपने ईश्वर को याद करते है ।
आलोचनाओं के लिये साल के बाकी दिन है और आलोचनाएं ज़रुरी भी है यही तो निर्माण तथा विकास के नये द्वार खोलेगीं ,पर आज के दिन इन्हें भूल कर मन से एक बार खुद पर भारतीय होने का गर्व करें । और रात को जब आप सोने लगें तो एक बार उन सैनिकों को अवश्य याद करें जो आज के दिन भी हमारी सुरक्षा के लिये कही शून्य से नीचे के तापमान में तो ,कही आग उगलते रेगिस्थान में सरहद पर पहरा देते हुये अपना फर्ज़ निभा रहें है ।
वे ना तो महज़ अपनी नौकरी के लिये न ही एक मराठी ,बंगाली ,पंजाबी या बिहारी के लिये नही बल्कि पूरे देश की सुरक्षा के लिये अपने वतन से प्यार की खातिर परिवारों से दूर बैठे है । इसलिये नमन करें उन्के इस जज़्बें को ,नमन करें उनके परिवारों के इस त्याग को
“ जय हिन्द ,जय हिन्द ,जय हिन्द की सेना ।“