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Monday, January 26, 2009

आज के दिन तो गर्व से कहें हम भारतीय है

आज गणतंत्र दिवस पर सुबह से टी.वी पर ,समाचार-पत्रों में ,इंटर्नैट पर इस दिवस के समाचार लेख देख सुन रही हूँ । कुछ भविष्य को ले कर आशावादी थे ,कुछ देश्वासियों के रवैये को ले कर आलोचनात्मक थे , कुछ जोशीले थे तो कुछ हताश थे । मेरा व्यक्तिगत मामना रहा है कि छब्बीस जनवरी और पन्द्रह अगस्त इन दो दिनों को हर देश्वासी को ऐसे मनाना चाहिये जैसे वे अपना जन्मदिन या कोई धार्मिक उत्सव मनाता है ,खुशी औए उत्साह से ,बिना किसी से झगड़ा या किसी की आलोचना किये । आखिर साल के बाकी दिन हमने यही करना है और यही तो करते है । आज के दिन खुश रहें ,गर्व करें अपने भारतीय होने पर । जोश और खुशी से मेरा मतलब कतई यह नही कि आप पी कर होटलों में डांस करें ,तेज़ रफ्तार गाड़ी चलाएं । खुशी माता-पिता व परिवार के साथ बैठ कर भी मनाई जा सकती है ,हर तरह की टेंशन भूल कर दिल खोल कर इस दिन का स्वागत करें । हमारे पूर्वजों ने बड़ी कुर्बानियाँ दे कर हमॆ यह दिन हासिल करके दिया है । अवश्य ही पिछले जन्म में हम ने कोई एक नेक काम तो ज़रुर किया होगा जो ईश्वर ने हमें महान ऋषि-मुनियों की ,ज़ोशीले क्रान्तिकारियों की ,ओजस्वी व विचारवान विचारकों की इस धरती पर आज़ाद भारतीय के रुप में जन्म दिया । आज का दिन उन्हें धन्यवाद देने का है । इसलिये आज के दिन को उतनी ही श्रद्धा से दिल से याद करें जितनी श्रद्धा से अपने ईश्वर को याद करते है ।

आलोचनाओं के लिये साल के बाकी दिन है और आलोचनाएं ज़रुरी भी है यही तो निर्माण तथा विकास के नये द्वार खोलेगीं ,पर आज के दिन इन्हें भूल कर मन से एक बार खुद पर भारतीय होने का गर्व करें । और रात को जब आप सोने लगें तो एक बार उन सैनिकों को अवश्य याद करें जो आज के दिन भी हमारी सुरक्षा के लिये कही शून्य से नीचे के तापमान में तो ,कही आग उगलते रेगिस्थान में सरहद पर पहरा देते हुये अपना फर्ज़ निभा रहें है ।

वे ना तो महज़ अपनी नौकरी के लिये न ही एक मराठी ,बंगाली ,पंजाबी या बिहारी के लिये नही बल्कि पूरे देश की सुरक्षा के लिये अपने वतन से प्यार की खातिर परिवारों से दूर बैठे है । इसलिये नमन करें उन्के इस जज़्बें को ,नमन करें उनके परिवारों के इस त्याग को 

“ जय हिन्द ,जय हिन्द ,जय हिन्द की सेना ।“

Thursday, January 15, 2009

क्या उद्योगपति देश के नागरिक नही है ?

देश के उद्योगपतियों ने गुजरात में समारोह के दौरान मुख्यमंत्री मोदी की जम कर तारीफ की और उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिये एक योग्य उम्मीदवार करार दे दिया । अब यह बात कांग्रेस को कैसे हज़म हो जायें । एक तो मोदी की इतनी तारीफ हो जायें और ऊपर से उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिये एक योग्य उम्मीदवार तक कह दिया जायें जिस पर गाँधी-नेहरु परिवार के इलावा और किसी का हक ही नही । जिस पर किसी और का बैठना तो दूर किसी और को उस के बारे में सोचना भी नही चाहिये । लिहाज़ा कांग्रेस को मिर्ची लगना स्वभाविक था पर जलन में कांग्रेस ऐसी प्रतिक्रिया देगें इस की उम्मीद नही थी । कांग्रेस प्रवक्ता मुनीष तिवारी का कहना है देश के मामलों में उद्योग जगत टाँग ना अड़ाए । क्यों ? क्या उद्योगपति देश के नागरिक नही है ? तो फिर वे अपने विचार क्यों ना प्रकट करें । कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि देश का प्रधानमंत्री उद्योग जगत की हस्तियां नही बल्कि देश की जनता चुनती है । बोलने से पहले कांग्रेस प्रवक्ता कुछ सोच तो लेते ,मनमोहन जी को प्रधानमंत्री देश की जनता ने नही आप की मैडम जी ने चुना था । आप ने तो चुनावों में किसी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार ही घोषित नही किया था ।

क्या दाउद को भी कार्ड भेजा जायेगा - समाचार है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाक राष्ट्रपति ज़रदारी को नव वर्ष की शुभकामनाओं वाला ग्रीटिंग कार्ड भेजा है । समझ में नही आता कि मनमोहन जी देश को किस-किस तरीके से शर्मसार करने पे तुले है ,क्या शर्मसार करने का विश्व रिकार्ड बनाना चाहते है । कभी आई.एस.आई चीफ को बुलाते है ,कभी हर विक्लप खुले रखने की बात करते है ,कभी युद्ध को समस्या का हल नही कहते है । और अब ज़रदारी को नव वर्ष की शुभकामनाओं वाला ग्रीटिंग कार्ड भेज दिया । संदेश लिखने के लिये स्याही की जगह क्या पता मुबंई हमले में मारे गये लोगों का खून इस्तेमाल कर लिया हो , अब तो आप से यह उम्मीद भी की जा सकती है । वैसे एक और खबर है कि दाउद नाना बन गया ,मुबारक का एक कार्ड अगर आप उसे भी भेज देगें तो अब देश की जनता को इस पर भी कोई हैरानी नही होगी । देशवासी अब आप को हर वह काम करता देखने के आदी हो गये है जिससे देश शर्मसार होता हो ,इसलिये लोगों की परवाह मत कीजिये ।

Monday, January 5, 2009

मनमोहन जी ,किस का पुनर्जन्म है ?

लेख पढ़ने वाले सभी पाठकों को नववर्ष की शुभकामनाएं ।

दिसम्बर महीने के शुरु में सर्दी की चपेट में आने की वजह से मुझे दो बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ा जिसके कारण मुझे पूरा महीना बैड पर अस्पताल के कमरे की छत और दीवार को देख कर या फिर टी.वी पर मंत्रियों के अजीबों-गरीब ब्यानों को देख- सुन कर गुज़ारने पड़े । कभी-कभी अपने प्रधानमंत्री मनमोहन जी को भी देख लिया , देख कर तसल्ली हुई कि वे देश में ही है ,बुश की विदाई जैसे बड़े मौके पर भी वे अमेरीका नही जा रहे । महान त्याग किया ,मैडम जी से सीखा होगा ।

बैड पर बैठे-बैठे टी.वी देखते हुये एक दिन मैंने कार्यक्रम देखा जिस में एक अमेरीकी शोधकर्ता अमिताभ ,शाहरुख ,नेहरु ,आदि कई भारतीयों के पुनर्जन्म के बारे में बता रहा था । पर अचानक मुझे ध्यान आया कि इस में मनमोहन जी के पुनर्जन्म के बारे मे नही बताया गया है । इस पर मुझे एक कहानी याद आ गयी जो मैने अपने बचपन में सुनी थी ।

एक राज्य पर उस का पड़ोसी राज्य हमला कर देता है । राजा अपनी सेना के साथ युद्ध में कूद पड़ता है । उसका सेनापति दिल का नेक पर काफी डरपोक व बड़बोला था । जोशीली ब्यानबाज़ी से जनता को मूर्ख बनाता रहता था । इसी कारण वह डर से युद्ध के मैदान से भाग कर घर आ जाता है और अपनी माँ और पत्नी से सामान बाँध दूसरे राज्य में चलने को कहता है । जब उसकी माँ और पत्नी सामान बाँध रही होती है वह बाहर बैठ जाता है । अचानक अंदर से बर्तनों के ज़ोर-ज़ोर से खड़कने की आवाज़ें आती है ,इस पर सैनिक की माँ अपनी बहू से कहती है कि मेरा बेटा तलवारों के आपस में टकराने की आवाज़ों के डर से ही तो भाग कर घर आया है तू ज़ोर-ज़ोर से बर्तनों को खड़का कर उसे डरा रही है । बाहर बैठा सैनिक यह सुन लेता है ,वह अपनी माँ से कहता है कि वह समझ गया कि जब देश खतरे में हो तो सैनिक का फर्ज़ लड़ते हुये विजय हासिल करना या शहीद होना होता है । ऐसे में डर य ब्यानबाज़ी का कोई काम नही होता ।

यह तो थी कहानी पर सवाल तो यह है कि मनमोहन जी ,किस का पुनर्जन्म है नीरो का- - ना । नीरो कम से कम बाँसुरी तो बजा ही रहा था जब रोम जल रहा था पर हमारे मनमोहन जी मुबंई हमलों के बाद से ले कर अब तक क्या कर रहें है ?

Monday, December 1, 2008

मनमोहन जी , कामपैलन पीते हो या बोर्नवीटा ?

मुझे समझ नही आता कि ईश्वर जब अक्ल बाँट रहे थे तो सरकार चला रहे लोग कहाँ थे ? दौरे पर थे या मैडम की जी-हजूरी कर रहे थे । लोग गुस्से से भरे हुये है और यह वही घिसे पिटे ब्यान देकर उनके गुस्से को और बड़ा रहे है । उससे भी अधिक गुस्सा आत है उनके हाव-भाव को देख कर । पुराने ब्यान और चकाचक कपडों के साथ अपनी बत्तीसी दिखाते हुये प्रेस कान्फ्रेंस करेगें । जब लोग मर रहें है तो ऐसे में यह कैसे अपना दिमाग (अगर है ) ठण्डा कैसे रखते है ,चाँदी वाला च्वनप्राश खाते है क्या ? पिछले कुछ दिनों में मनमोहन जी की देख कर तो मुझे पूरा यकीन हो गया है कि वे कोई ना कोई एनर्जी ड्रिंक तो लेते ही है । वर्ना इतनी चुस्ती-फुर्ती तथा बहादुरी दिखा सकते थे ? यह चुस्ती-फुर्ती नही तो और क्या है कि जो काम वे साढ़े चार सालों मे करते आये है वो सारे काम उन्हें मात्र चार दिन में करने पड़े ,बुश को फोन ,मैडम जी की जी-हजूरी ,राहुल बाबा से झाड़ । इन सारे कामों को एक के बाद एक चुस्ती से करने के लिये एनर्जी की ज़रुरत तो पड़्ती ही है । और बहादुरी की बात करे तो क्या यह बहादुरी नही कि साढे चार सालों से वे इतनी लाशों का बोझ उठा रहें है पर रोना तो दूर कभी भी आँखें तक नम नही की , हर बार पिछ्ले हादसे को भूल अगले हादसे का इंतज़ार करने लगते है । अब सवाल यह है कि कामपैलन पीते है या बोर्नवीटा ?

इन के ब्यानों से इतनी सड़ांध आती है कि इनकी तुलना कूड़े-कर्कट की गंदगी  से भी नही हो सकती । उससे से भी उपयोगी खाद बनाई जा सकती है इनके विचारों से सिवा बदूब के और कुछ नही उठता ।

‘ महान ’ शिवराज पाटिल का जाना – शिवराज जी के इस्तीफे से मेरे मन में दो सवाल उठे -

पहला - शिवराज जी के जाने पर खुश होये या नही ।

दूसरा - शिवराज जी के इस्तीफे का असली कारण ।

तय नही कर पायी कि शिवराज जी के जाने पर खुश होना चाहिये या नही । इस की वजह है कि चिदम्बरम जी का गृहमंत्री बनना । यह वह ‘ महान ’ बंदा है जिसे देश का सबसे दमदार मंत्रालय दिया गया था उसका कैसे इस ने दम निकाला है ,उससे हम सब वाकिफ है । अब की बार उसे वह मंत्रालय दिया है जिसका पहले ही दम निकला है ,अब उसका यह और क्या-क्या निकालेगा ,यह देखने वाली बात होगी ।

अब बात करें शिवराज जी के इस्तीफे का असली कारण की । इसका असली कारण है मैडम जी को हिन्दी देर से समझ आना । आज तक कांग्रेस दूसरों पर साम्प्रादायिक होने का आरोप लगाती रही ,पर अब जा कर कांग्रेस की मैडम जी  को समझ आया कि साम्प्रदायिकता तो उसके अपने घर में है । उनके लिये हिन्दू हर तरह से साम्प्रदायिकता का प्रतीक है ,पर इस सरकार में ज़्यादातर मंत्रीयों के नाम या तो हिन्दू देवी-देवताओं के नाम पर है या उनके वाहन के नाम पर या हिन्दू प्रतीकों के नाम पर । जैसे शिव ,शंकर राम ,अर्जुन,प्रसाद, ,सोमनाथ ,शरद ,अमर ,सिंह ,मीरा ,प्रणव वगैरहा-वगैरहा ।

यह बात मैडम जी को चार साल बाद समझ में आयी ,हिन्दी कमज़ोर है ना उनकी । जब नाम के मतलब समझ में आयें तो उन्होंने मनमोहन जी को बुला उन से शिकायत की । तब मनमोहन जी का जवाब था मैडम हिन्दी तो मुझे भी कहाँ आती है ,मैं तो इन्डियन हूँ हिन्दोस्तानी नही । अगर हिन्दोस्तानी होता तो रोज़ हिन्दोस्तानियों को मरता देख मेरा दिल ना रोता । अब अगर बाकी अपनी गद्दी बचाना चाहते है तो फौरन धर्म-स्थलों की और भागें ( बेवकूफों मन्दिरों की और मत भागना , गद्दी तो जायेगीं-जायेगीं ,हो सकता है आंतकी बन जेल पहुँच जाओ ) , अपना नाम बदलें हो सके तो अपने नाम में कुछ घटा-बढ़ा ले । बच जाओगे ।

Sunday, November 30, 2008

आई.एस.आई चीफ से क्या चुनाव प्रचार करवाना चाहते थे ?

मनमोहन जी ,हमें और शर्मसार मत कीजिये  - पिछला लेख ब्लाग में डालने के बाद मैंने यह तय कर लिया था कि अब इस मुद्दे पर कम से कम प्रधानमंत्री को लेकर कोई लेख नही लिखूँगी क्योंकि मुझे लगता था कि अब मनमोहन जी कुछ ऐसा नही कह सकते जिस पर देश और शर्मिन्दा होगा पर चंद घण्टों में ही मेरा विचार गलत निकला । जब पूरा आप्रेशन खत्म होने को था तभी एक समाचार न्यूज़ चैनल पर प्रसारित हुआ ,

भारतीय प्रधानमंत्री ने फोन कर पाक प्रधानमंत्री से आई.एस.आई चीफ को भारत भेजने को कहा ।

खबर है कि पाक प्रधानमंत्री ने पहले हामी भर फिर इंकार कर दिया है ।

यह पता नही कि मनमोहन जी ने फोन खुद किया था या किसी के कहने पर किया । अगर खुद किया था ( वैसे देश को उम्मीद तो नही कि इतना बड़ा काम वो खुद कर सकते है ) फिर भी अगर खुद किया है तो फिर तो देश यही चाहेंगा कि वे आगे से हर काम पूछ के किया करें और अगर पूछ कर किया था तो देश यही दुआ करेगा कि अक्ल भी बाज़ार में जल्द से जल्द मिलने लग जायें ताकि सरकार चला रहें लोगों का भला हो जायें । वैसे मैंने बहुत सोचा पर यह समझ नही आया कि वे आई.एस.आई चीफ को भारत क्यों बुलाना चाहते थे ? क्या उसे बंदी बनाना चाहते थे या उसे भारत भ्रमण करवाने का इरादा था ? नही तो कही उससे पार्टी के लिये चुनाव प्रचार या वोट तो नही चाहते थे ? यह सब काम मुश्किल है । बंदी बना नही सकते और भारत-भ्रमण में सुरक्षा का खतरा होगा ,भई देश में जगह-जगह धमाके और आतंकवादी हमले हो रहे है । अब वे देशवासी तो है नही कि जिस के लिये चिन्ता ना होगी ,अरे अगर वह मर-वर गया ना तो उसे दफनाने या उसकी लाश उसके मुल्क भेजने का खर्चा भी आप ही को करना होगा और अगर हाथ-पाँव तुड़वाकर सात-आठ महीने के लिये अस्पताल भर्ती हो गया तो उसके खाने-पीने और उसकी शरीर की सिलाई का खर्चा भी आप ही को देना होगा । और अगर उससे पार्टी के लिये चुनाव प्रचार या वोट चाहते थे तो वह भी मुश्किल होता । चुनाव प्रचार में चुनाव आचार-संहिता आड़े आती और वोट करने पर बोगस वोटिंग का मामला बनता । और चुनाव आयोग नोटिस थमा देता ,इस तरह लेने के देने पड़ जाते ,बच गये ।

इसलिये देश मनमोहन जी से उम्मीद करता है कि जो काम वे अभी तक कर रहें थे वही करे । बुश को फोन करे , फीता काटे ,बुतों पर से पर्दा हटाये ,मैडम जी की जी-हजूरी करे ,राहुल को देश का तो क्या चाहें तो सारे विश्व का भविष्य बता दें और लोगों को खुशी-गमी के संदेश भेजे । पर देशवासियों की सुरक्षा और समस्याओं जैसे छोटे-मोटे काम रहने दे ।

सलाम उन शहीदों को - मुंबई हमले में जिन वीरों ने शहादत दी है उन की वीरता पर बोलने के लिये कोई शब्द नही है हमारे पास । पूरा देश ऋणी है उनका । इन में ऐसे भी कई शहीद होगें जिन्होंने बिना वर्दी और हथियार के अदम्य साहस का परिचय देते हुये दूसरों के प्राण बचाते हुये अपना जीवन कुर्बान कर दिया । उन अन्जान चेहरों और देश के बहादुर सिपाहियों को मेरा शत-शत नमन ।

“ कोई सिख ,कोई जाट ,मराठा ,कोई बंगला ,कोई गुजराती ,

इस हमले में मरने वाला हर वीर था भारतवासी ।“

“ थी खून से लथपथ काया ,फिर भी बँदूक उठा कर ,

दस-दस को एक ने मारा ,फिर गिर गये होश गँवा कर ,

जब अंत समय आया तो कह गये कि अब चलते है ,

खुश रहना देश के प्यारों अब हम तो सफर करते है “

* * * * * * * *

“ जय हिन्द ,जय हिन्द ,जय हिन्द की सेना ।“

Saturday, November 29, 2008

प्रधानमंत्री जी ,ज़रा आँख में भरीये पानी

मुम्बई हमलों के दौरान जो मनमोहन जी ने कहा ,जो किया मुझे लगा था यह इंतहा है वे देश को इससे ज़्यादा शर्मसार नही कर सकते । लेकिन मैं गलत निकली । जिस दयनीयता ,जिस लाचारी का परिचय उन्होंने दिया निश्च्य ही हर देशवासी उससे शर्मिन्दा है ( मै कांग्रेसियों की बात नही कर रही हूँ उन को शर्मिन्दगी तभी होगी जब उन की मैडम जी कहेगीं और वे तब तक नही कहेगीं जब तक कि ऐसा उन के भाषण के पेज में नही लिखा होगा ) 

सवा सौ करोड़ की आबादी वाले इस मुल्क के लोग किसी दूसरे मुल्क की मिट्टी को छू कर सोना बनाने की ताकत रखते है , बहादुरों जवानों की कमी नही है इस मुल्क में । ऐसे देश के प्रधानमंत्री ने एक अदने से मुल्क के सामने जिस तरह अपनी लाचारी को दिखाया है वह बेहद शर्मनाक है । एक मज़बूत देश का प्रधानमंत्री इतना मजबूर कैसे हो सकता है ? किस बात ने उन्हे रोका है ? इटली से आदेश का इंतज़ार है या अमेरीका से डरते है ?

आप मुम्बई का दौरा कर आये है ,पर तनिक भी विचलित नही ,ज़रा भी आँखों में नमी नही है । पूरी दुनिया हमें कायर और कमज़ोर कह रही है पर आप बिना आक्रोश के सुन रहे है , वाकाई आप बहुत बहादुर है  पर हम आप के जितने बहादुर नही है । आप अपने सामने खून से लथपथ और दर्द से कराहते लोगों को देख कर भी शांत है पर हमारे साथ ऐसा नही है । हम टी.वी पर तस्वीरें देखते है तो गुस्से और आक्रोश से भर जाते है और अगर टी.वी नही देखते तो उन तस्वीरों के दर्द से हमारी आखें नम हो जाती है और नमी इतनी ज़्यादा होती है कि सब कुछ धुंधला-धुंधला लगता है । आप या तो हमें कुछ ऐसा उपाय बताईये जिससे आप ही की तरह हमारी आँखों का पानी भी मर जायें या फिर कुछ ऐसा कीजिये जिससे हमारी आँखों की नमी आप की आँखों में भी आ जायें ।

Friday, November 28, 2008

मंत्री जी ,मेहरबानी कर टी.वी से दूर रहें

मुम्बई हमलों से पूरा देश हिला हुआ है ,नही हिली है तो केन्द्र सरकार । वही पुराने ब्यान और काम करने के वही लचर तरीके । देश पर अब तक का सबसे बड़ा आंतकी हमला हुआ है ,पर ज़रा याद कीजिये कि आप को सरकार के कितने मंत्री दिखाई दिये । हमले के कई घण्टे बीतने के बाद सरकार के रुप में क्या दिखा है -

सोनिया गाँधी का कहना था -हमला देश और समाज के लिये चुनौती है और हम सब को मिल कर इस का मुकाबला करना है ।

राहुल गाँधी का कहना था – देश आतंकवाद से लड़ेगा और जीतेगा ।

मनमोहन सिंह ने बिना पाकिस्तान का नाम लिये पड़ोसी देशों को चेतावनी दी ।

उन्हें शायद सब से बड़ी तसल्ली अमेरीका से फोन आने पर हुई होगी ।

हमारे ‘ गुणी ’ और ‘ दार्शनिक ’ गृहमंत्री हर बार की तरह अपने पिछ्ले ब्यान को दोहरा गये । बस साथ मे एक और लाईन जोड़ी कि हमलों की जान्कारी तो थी पर पुख्ता जानकारी नही थी ।

शिवराज जी आप आंतकी हमलों पर बोल रहे ना कि अपने सूट के रंग पर ,जिस के कि दुकान्दार से पुख्ता होने की गारंटी माँग रहे है ।

रक्षा मंत्री और विदेश-मंत्री ने इस पर कोई ब्यान दिये हो इस का मुझे पता नही । हाँ कपिल सिब्बल ज़रुर एक कार्यक्रम में शामिल हुये ,उन्होंने बहुत कुछ कहा पर ज़रा उन की दो बातें सुनीये -

यह हमला पूरी तैयारी से हुआ है तथा हमले मे पाक के हाथ होने के बारे में अभी वे कह नही सकते ।

कोई उन से पूछें कि अगर हमला पूरी तैयारी से हुआ है तो उनकी सरकार क्या कर रही थी ? रही पाक के हाथ होने की बात तो सिब्बल जी के ब्यान से पहले हर टी.वी चैनल पर यह खबर आ रही थी कि हमले मे शामिल आंतकी पाक से आये थे ।

इस हमले ने एक बात तो साबित कर ही दी है कि सरकार के पास आपात स्थिति से निबटने की कोई योजना ही नही है । । सरकार को लगता है कि सौ करोड़ से ऊपर की आबादी वाले देश में कुछ लोग मर भी जायेगे तो भी उन का वोट बैंक सुरक्षित रहेगा  ,बंगलादेशी है ना उन का वोट बैंक मज़बूत करने के लिये । और देशवासी भी सरकार को कितनी देर कोसेगें ,आखिर तो अपने काम में लग ही जायेंगे । सही सोच रही है सरकार ज़रा सब के ब्यानों को गौर से पढ़े ,लगता है आप को कि इन के पिछले ब्यान से अलग है । तो फिर क्यों ब्यान दे रहे है यह ? टी.वी पर इन की शक्ल देख कोफ्त हो रही है और इन के ब्यान धमाकों की निंदा , जाँच तथा कड़ी कारवाई का भरोसा ,लोगों से शांत रहने की अपील । यह सब घावों पर मरहम की तरह नही बल्कि नमक की तरह लग रहा है । इसलिये प्रधानमंत्री और उनके  मंत्री देश पर बड़ी मेहरबानी करेगें अगर वे टी.वी से दूर रहे ,बल्कि हो सकें तो देश से दूर विदेश यात्रा पर चले जाये ,धूप सेकें या मैडम की चम्मचागिरी करें ,पर टी.वी से दूर रहे । देश टी.वी पर उन की हमदर्दी की नौटकी नही देखना चाहता बल्कि अपने शहीद हुये जवानों को आखरी नमन करना चहता है , वे सलाम करना चाहता है अपने उन बहादुरों को जो अपनी जान की परवाह किये बिना आतंकियों को मुँह तोड़ जवाब दे रहे है ,और उन बेकसूरों को जो हमारी सरकार की कायरता के कारण अपने ही देश में ,अपने ही घर में बंधक बने मौत के मुँह में खड़े है ।

इसलिये देश पर आप की बड़ी मेहरबानी होगीं प्रधानमंत्री जी अगर आप और आप के मंत्री टी.वी से दूर रहे ।

Thursday, November 27, 2008

क्या प्रधानमंत्री आज रात सो पायेगें ?

देश पर हुये आंतकी हमले ने हिला कर रख दिया है । मन पीड़ा और आक्रोश से भरा हुआ है । पीड़ा उनके लिये जो बिना किसी कारण मौत के मुँह मे समा गये । एक व्यक्ति की मौत से कितने लोग प्रभावित हुये होगें ,मरने वाला /वाली किसी के पुत्र /पुत्री होगें ,इस आयु में उन के लिये  यह बहुत बड़ा सदमा है  ।

                  सोनिया जी ,प्रधानमंत्री , गृहमंत्री और मुंबई के मुख्यमंत्री ने हमलों की निंदा कर दी है । गृमंत्री जी का पुराना रिकार्ड चालू है । लोगों की सहनशक्ति की तारीफ की और बताया कि यह झगड़ा भाई-भाई के बीच नफरत पैदा करने के लिये किया गया है । अभी तक सरकार की और से यही जानकारी दी गयी है । बाकी जो भी जानकारी देश को मिल रही है वे  न्यूज़ चैनल के उन पत्रकारों से मिल रही है जो अपनी सुरक्षा की चिन्ता किये बिना वहाँ खड़े है ।

सरकार चलाने वाले लोग इतने संवेदनहीन कैसे है ? क्या वाकई देश के लोग इन के लिये वोट बैंक से अधिक कुछ नही है ? हमारे प्रधानमंत्री जी बड़े सज्जन माने जाते है । बहुत ही भावुक है ,इसीलिये बेंगलुरु मे एक माँ को रोता देख दिल्ली में बैठे हमारे प्रधानमंत्री जी सारी रात सो नही पाये थे यह बात अलग है कि दिल्ली में धमाकों के बाद ऐसा कुछ नही हुआ । तो क्या दर्द और आँसूओं में भी फर्क होता है ?

आज तो कई माताएं आँसू बहा रही है । उन के साथ पूरे देश की आँखें नम हो रही है । न्यूज़ चैनलस पर बहुत सी तस्वीरें दिखाई जा रही है  जो मन को  विचलित कर रही है ।  न्यूज़ चैनल  और कई समाचार-पत्रों में एक तस्वीर दिखायी  गयी है  , एक  नन्ही सी बच्ची जो घायल है उसे एक सुरक्षा-कर्मी गोद में उठा कर पानी पिला रहा है । तस्वीर देख कर एक और मन जहाँ विचलित हो रहा है वही प्रश्न कर रहा है कि क्या कसूर है इस बच्ची का और उन निर्दोष लोगों का जो इस त्रासदी का शिकार हुये है । पता नही कि प्रधानमंत्री ने उस तस्वीर को देखा है या नही । और अगर देखा है तो क्या  ऐसे में प्रधानमंत्री आज रात सो पायेगें ?

Tuesday, November 11, 2008

क्या आप ने प्रधानमंत्री को देखा है ?

सवाल पढ़ कर आप कहेगें ,‘ यह कैसा सवाल है अभी कल- - अ ,नही शायद परसों - - नही शायद पिछले हफ्ते - - या - -’ जाने दीजिये आप को याद नही आयेगा । मैं स्वंय पिछले कई दिन से अपने देश के प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह को न्यूज़ चैनल और समाचार पत्रों में खोज रही हूँ परन्तु वह मुझे मिल नही रहे । कुछ चैनल पर मनमोहन जी के फोटो सहित ब्यान अवशय आये आर्थिक मंदी ,चन्द्र्यान मिशन और त्योहारों पर देशवासियों को बधाई के। वह भी लाईव टैलीकास्ट नही बल्कि उनकी पुरानी तस्वीरों के साथ उनके ब्यान नज़र आते है। आतंकवाद ,बेलगाम महँगाई , ठाकरे ,राहुल राज केस ,बाटला एन्काऊटर ,असुरक्षित दिल्ली आदि कई ऐसे मुद्दे है जिस पर देश में आये दिन चर्चा होती ही रहती है जिस पर जनता से ले कर नेता तक बोलते है पर जिस व्यक्ति का ब्यान अहमियत रखता है वही बस खामोश है । मनमोहन सिंह जी की सरकार तथा पार्टी का लगभग हर छोटा-बड़ा नेता हर दूसरे-तीसरे दिन मीडिया में लोगों को ब्यानबाज़ी करता दिख जाता है ,नही दि्खाई देते तो मनमोहन सिंह जी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी कहते है कि ,‘देश के बैंक पूरी तरह से सुरक्षित है ,चिन्ता की कोई बात नही । ’ पर मनमोहन सिंह जी देशवासी असुरक्षित है उसकी तो चिन्ता कीजिये । कही बम ब्लास्ट तो कही दंगे। इतना अनिश्चित तो आज शेयर बाज़ार भी नही है जितना इस महौल में एक आम आदमी का जीवन हो गया है ।
देश को इंतज़ार है मनमोहन जी के बोलने का पर मनमोअहन सिंह जी को किस का इंतज़ार है - - शायद मैडम जी की अनुमति का ।

Friday, October 31, 2008

यह भी पाटिल ,वह भी पाटिल

भारत के गृहमंत्री है शिवराज पाटिल और महाराष्ट्र के गृहमंत्री है आर.आर.पाटिल । शिवराज दिल्ली में रहते है और आर.आर.पाटिल मुंबई में रहते है । दिल्ली और मुंबई के बीच काफी दूरी है पर इस के बावजूद इन दोनों के बीच काफी समानता है । यह एक मात्र संजोग है पर इन दोनों के बीच की समानता हैरान कर देती है :-

-  दोनों के नाम  तीन अक्षर के है ।

- दोनों के उपनाम पाटिल है ।

- दोनों ही गृहमंत्री पद पर आसीन है ।

- दोनों का संबंध कांग्रेस से है ।

        यह समानताएं तो सामान्य है ,किन्हीं भी दो व्यक्तियों के बीच में हो सकती है । पर एक समानता ऐसी है जो वास्तव में हैरानी पैदा करती है वह है दोनों के बीच ब्यानों की समानता । आतंकवाद और अपराध पर दोनों ना सिर्फ एक जैसे ब्यान देते है बल्कि उन ब्यानों के शब्द भी लगभग एक जैसे ही होत है । जैसे- जाँच चल रही है ,कड़ी कारवाई की जायेगीं ,दोषी  छोड़े नही जायेगें ,लोग शान्ति बनाये रखे ,हम इस घटना की घोर निंदा करते है ,वगैरहा-वगैरहा ।

अब सोचने वाली बात यह है कि अन्य समानताओं की तरह ही   यह भी क्या मात्र एक संयोग ही है  या फिर कही ऐसा तो नही कि इन दोनो नेताओं के ब्यान लिखने वाला व्यक्ति एक ही हो इसी कारण इन दोनो के ब्यान एक जैसे होते है पर अगर शब्द एक है भी तो कम से कम यह दोनो अपना बोलने का अंदाज़ ही बदल ले। फिल्मों मे भी तो दो हीरों को भले ही एक ही लेखक संवाद लिख कर देता है पर दोनो के बोलने का अंदाज़ तो अलग-अलग ही होता है । यह बात आर.आर.पाटिल मुंबई में रह कर भी नही समझे । यह काम तो आर.आर.पाटिल ही कर सकते है। क्योंकि शिवराज जी के पास इन छोटे-मोटे कामों के लिये समय नही है। उन्हें अपने कपड़ों और जूतों का ध्यान रखना होता है और फिर मैडम जी से मिल उन्हें गृहमंत्री का पद देने के लिये उनका धन्यवाद  कहना होता है । ऐसे मे जनता को ब्यान देने जैसे छोटे-मोटे काम भी उन्हीं से करने की अपेक्षा की जायें ,यह तो इस उम्र में उन के साथ ज़्यादती करने वाली बात हुई ना !